Class 12 Physics Chapter 1 Notes in Hindi (वैद्धुत आवेश तथा क्षेत्र)

Class 12 Physics Chapter 1 Notes in Hindi (वैद्धुत आवेश तथा क्षेत्र)

वैद्धुत आवेश

एक इलेक्ट्रॉन या एक प्रोटॉन के आवेश को मूल आवेश कहते हैं।

इसे q से सूचित किया जाता हैं। तथा यह एक अदिश राशि है।

चालक तथा विद्युतरोधी

चालक :- वैसे पदार्थ जिन से होकर आवेश का प्रवाह सुगमता से होता है, उन्हें चालक कहा जाता है।  जैसे लोहा, चाँदी, ऐलुमिनियम आदि।

विद्युतरोधी:- वैसे पदार्थ जिन से होकर आवेश का प्रवाह सुगमता से नही होता है, उन्हें विद्युतरोधी/कुचालक कहलाते है। इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रान नही होते है। जैसे – कांच, प्लास्टिक, लकड़ी, मोम, सीसा, रेशम, नमक आदि।

प्रेरण द्वारा आवेशन

किसी अनावेशित वस्तु से स्पर्श कराये बिना ही अनावेशित वस्तु को आवेशित करने की विधि प्रेरण द्वारा आवेशन कहलाता है। प्रेरण द्वारा आवेशन विधि में अनावेशित वस्तु पर आवेशित वस्तु का विपरीत आवेश उत्पन्न होता है।

वैधूत आवेश के मूल गुण

1.अवेशो की योज्यता :- किसी भी पदार्थ का कुल आवेश उसके विभिन्न भागो में उपस्थित सभी आवेशी के बीजगणितीय योग के बराबर होता है, आवेश के इस गुण को आवेश की योज्यता कहते है।

2. वैधूत आवेश संरक्षित है:- इसके अनुसार विद्युत आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है ओर न ही नष्ट किया जा सकता है।  सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण किया जा सकता है, जैसे किसी आवेशित वस्तु को दूसरे किसी चालक के साथ संपर्क कराया जाता है ।

3. वैधूत आवेश का क्वांटीकरण :- विधुत आवेश को विभाजित नहीं किया जा सकता है, विधुत आवेश के इस गुण को विधुत आवेश का क्वांटीकरण कहते हैं | प्रत्येक आवेशित पदार्थ का आवेश की मात्रा एक इलेक्ट्रॉन का आवेश की मात्रा के पूर्ण गुणज होती है |

कूलॉम नियम

“दो स्थित बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला आकर्षण तथा प्रतिकर्षण बल, दोनों आवेशों की मात्राओं के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है। तथा उन आवेशों के बीच की दूरी के वर्ग के व्यूत्क्रमानुपाती होता है। ” कूलॉम का नियम कहलाता है।

माना कि यदि दो आवेश q1 तथा q2 हैं। जो एक दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं। तब इनके बीच लगने वाला बल –

यहां k एक नियतांक है, जिसे परावैद्युतांक कहते हैं। इसका मान 9 × 109 होता है। इसका SI मात्रक न्यूटन-मीटर2/कूलाम2 होता है।

बहुल आवेशो के बीच बल

सुनेंरोकेंइस सिद्धान्त को बहुल आवेशों के मध्य बल के नाम से भी जाना जाता है। दो बिन्दु आवेशो के मध्य पारस्परिक विद्युत बल कुलाम के नियम के द्वारा प्राप्त होता है। जब आवेशो का एक समूह किसी आवेश पर बल लगाता है ,तो अध्यारोपण का सिद्धांत उस आवेश पर लगने वाले बल को प्रदान करता है।

विधुत क्षेत्र

किसी स्थान पर स्थित किसी स्थिर आवेशित कण पर बल लगता है तो  उस स्थान पर विद्युत्-क्षेत्र कहते है। विद्युत क्षेत्र आवेशित कणों के द्वारा उत्पन्न होता है अथवा समय के साथ परिवर्तित हो रहे चुम्बकीय क्षेत्र के कारण।  विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है।

आवेशो के निकाय के कारण विधुत क्षेत्र

विधुत क्षेत्र का अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार , किसी बिंदु पर आवेश  समूह के कारण उत्पन विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर सभी आवेशो के कारण उत्पन विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता के सदिस योग के बराबर होता है।

यदि आवेश के निकाय जिसमें q1,q2,q3 …..qn बिंदु है। तो इन आवेशों के कारण p बिंदु पर उत्पन्न विद्युत् तीव्रता E1,E2, E3…..En होगी।

विधुत क्षेत्र का भौतिकी अभिप्राय

  • विद्युत क्षेत्र में स्थैतिक परिस्थितियों में आवेशों के आसपास के संग्रह को दर्शाता है।
  • जब विद्युत आवेश गति करना शुरू करते हैं और विद्युत धारा के रूप में प्रवाहित होते हैं, जब समय पर निर्भर विद्युत चुंबकत्व की अवधारणा को समझने की कोशिश करते हैं, विद्युत क्षेत्र का भौतिक महत्व समझा जाता है।
  • विद्युत क्षेत्र विद्युत चुम्बकीय आवेशों की प्रकृति और परस्पर क्रियाओं को समझने में मदद करता है।

विद्युत क्षेत्र सिर्फ कुछ गणितीय सत्ताएँ नहीं हैं, बल्कि उनके भौतिक अस्तित्व को महसूस और अनुभव किया जा सकता है। इसलिए, विद्युत क्षेत्र कई अन्य परिघटनाओं की ओर ले जाता है जो प्रभावित करती हैं कि प्रकृति कैसे काम करती है। यह विद्युत क्षेत्र की अवधारणा और भौतिक महत्व है।

विधुत क्षेत्र रेखाएं

जब किसी चुंबक के पास कोई चुंबकीय सुई लायी जाती है, तो चुंबकीय सुई घूमकर एक निश्चित दिशा में रूक जाती है, यदि चुंबक की दिशा की परिवर्तन कर दें, तो चुंबकीय सुई की दिशा भी परिवर्तित हो जाती है। चुंबकीय सुई एक वक्र पथ पर विचलित होती रहती है। चुम्बकीय क्षेत्र की रेखाएं वक्र रेखाओं के रूप में होती हैं। इन वक्र रेखाओं को चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (magnetic field lines) कहते हैं।

विधुत फलक्स

विद्युत क्षेत्र में रखें किसी पृष्ठ से लंबवत गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं।

इसे ΦE  से प्रदर्शित करते हैं|

विद्युत फ्लक्स एक अदिश राशि है।विद्युत फ्लक्स का मान धनात्मक ऋणात्मक व शून्य हो सकता है।

चुंबकीय द्विध्रुव

परस्पर कुछ दूरी पर रखे दो बराबर या विपरीत ध्रुव प्रबलता के दो ध्रुवों का निकाय एक चुंबकीय द्विध्रुव कहलाता हैं। चुंबकीय द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण, एक ध्रुव की प्रबलता तथा दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी के गुणनफल के बराबर होता है। इसे M के द्वारा दर्शाया जाता है।

एकसमान बाह्य क्षेत्र में द्विध्रुव

एकसमान विद्युत क्षेत्र E में रखे द्विध्रुव आघूर्ण p के स्थायी द्विध्रुव

यहाँ आवेश q पर GE तथा -q पर -GE बल लग रहे हैं। तथा E एकसमान है अतः – द्विध्रुव पर नेट बल शून्य है। परंतु आवेशों में पृथकन है, अतः बल भिन्न बिंदु पर लगे हैं, जिसके परिणामस्वरूप द्विध्रुव पर बल आघूर्ण कार्य करता है। जब नेट बल शून्य है तो बल -qE । आघूर्ण मूल बिंदु पर निर्भर नहीं होता। इसका परिमाण प्रत्येक बल के परिमाण एकसमान विद्युत क्षेत्र तथा बलयुग्म की भुजा (दो प्रतिसमांतर बलों के बीच लंबवत दूरी) के गुणनफल के बराबर में द्विध्रुव होता है।

गाउस नियम

 गाउस का नियम किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाले फ्लक्स तथा उसमें उपस्थित कुल आवेश के मध्य संबंध को व्यक्त करता है।  निर्वात में उपस्थित बंद पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ में उपस्थित कुल आवेश (Σq) का  1/ε0 गुना होता है।

    Φ = Σq/ε0

गाउस नियम के अनुप्रयोग

  1. अनंत लंबाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र :- किसी अनंत लंबाई के एकसमान रेखीय आवेश घनत्व λ के तार के निकट r दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है। तो इसके लिए तार के चारों ओर एक बेलनाकार गौसियन पृष्ठ खींचते हैं। इस पृष्ठ पर एक क्षेत्रफल अवयव dA लेते हैं।
  2. एकसमान आवेशित अनंत समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र :- एक अनंत विस्तार की आवेशित समतल चादर पर है। जिस पर एकसमान पृष्ठीय आवेश घनत्व σ है। आवेशित समतल से r दूरी पर एक बिंदु P है। जिस पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है, तब इसके लिए एक गौसियन पृष्ठ की खींचते हैं जो कि एक बेलनाकार आकृति का होगा।

Physics Class 12 Chapter 2 Notes in Hindi
Physics Class 12 Chapter 3 Notes in Hindi
Physics Class 12 Chapter 4 Notes in Hindi
Physics Class 12 Chapter 5 Notes in Hindi

Download PDF

Tagged with: class 12 physics chapter 1 ncert notes in hindi | Class 12 Physics Chapter 1 Notes in Hindi | class 12th physics chapter 1 notes in hindi pdf | ncert class 12 physics chapter 1 notes pdf in hindi | physics chapter 1 class 12 notes in hindi | physics class 12 chapter 1 in hindi notes | physics class 12 chapter 1 notes in hindi | physics class 12 chapter 1 notes in hindi pdf | physics class 12 chapter 1 notes in hindi pdf download

Class: Subject: ,

Have any doubt

Your email address will not be published. Required fields are marked *